बुधवार, 5 जनवरी 2022

व्याकरण

व्याकरण:-

 परिभाषा- व्याकरण  वह शास्त्र है जिसमें भाषा  की व्याख्या अर्थात विश्लेषण किया जाता है|

 व्याकरण के मुख्य तीन विभाग  होते हैं|

1. वर्ण विभाग

2. शब्द  विभाग

3.वाक्य विभाग

  • व्याकरण के अध्ययन से हमें भाषा के शुद्ध रूप का ज्ञान होता है| 

  •  व्याकरण को भाषा रूपी नदी के तटबंध भी कहा जाता है|

भाषा :-

भाषा वह साधन है जिसके माध्यम से मानव समुदाय परस्पर विचार विनिमय करता है

प्रत्येक भाषा के दो रूप होते हैं - मौखिक और लिखित भाषा

1.  मौखिक भाषा:-

भाषा का वह रूप जिसे बोलकर भावों को प्रकट किया जाता है तथा सुनकर अर्थग्रहण, मौखिक भाषा कहलाती है|

यह भाषा का प्रारंभिक व मूल स्वरूप है जिसके माध्यम से सीमित लोगों से विचार विनिमय किया जा सकता है|

2.  लिखित भाषा:- भाषा का वह रूप जिसमें पढ़कर अर्थग्रहण और लिखकर भाषा अभिव्यक्ति की जाती है उसे लिखित भाषा कहते हैं|

लिखित भाषा के माध्यम से स्थान व काल की सीमाओं का उल्लंघन कर विचार विनिमय किया जा सकता है 

मौखिक भाषा की लघुतम इकाई ध्वनि कहलाती है

वर्ण विचार:-

  • मानव मुख से निकली हुई ध्वनियों को लिखने के लिए जिन चिन्हों का प्रयोग किया जाता है उन्हें वर्ण कहते हैं
  •  वह संकेत / लिपि चिन्ह  जिनके माध्यम से ध्वनियों को लिखित रूप दिया जाता है वर्ण कहलाते  हैं|

  • हिंदी वर्णमाला में वर्णों की कुल संख्या 52 है|

  •  लिखित भाषा की लघुतम इकाई/ भाषा की लिखित लघुतम इकाई वर्ण कल आती है|

  • हिंदी में मूल वर्णो ध्वनियों की संख्या 44 हैं|

  •  हिंदी की मूल ध्वनियों को दो भागों में बांटा गया है-   1.  स्वर       2.  व्यंजन

स्वर :-

वे ध्वनियाँ जिनका  उच्चारण स्वतंत्रता पूर्वक किया जाता है और उच्चारण के समय वायु मुख के किसी भी अव्यय  से टकराए बिना निर्बाध गति से बाहर निकल जाती है स्वर कहलाते हैं|

हिंदी में स्वरों की संख्या 11 मानी गई है :-अ,आ,इ,ई,उ,ऊ,ऋ,ए,ऐ,ओ,औ

हिंदी के स्वर:- कुछ विद्वान ‘ऋ‘ स्वर की श्रेणी से बाहर करते हुए स्वरों की संख्या 10 मानते हैं | यह विद्वान तर्क देते हैं कि ‘ऋ’ का उच्चारण करते समय वायु बाधित होकर बाहर निकलती है|

 ‘ऋ’ स्वर माना जाना चाहिए क्योंकि हिंदी छंद विधान और मात्रा विधान में ‘ऋ’ की मात्रा की गणना की जाती है और मात्रा सदैव स्वर की ही होती है|

स्वरों का वर्गीकरण:-

हिंदी के स्वरों का वर्गीकरण छ: आधारों पर किया जाता है:- 

  1. उच्चारण समय/ मात्रा/ काल के आधार पर - हृस्व स्वर , दीर्घ स्वर 

  2.  रचना/ बनावट/ निर्माण/ व्युत्पत्ति के आधार पर - मूल,संधि 

  3.  जिह्वा स्थान के आधार पर - अग्र,पश्च,मध्य 

  4.  मुखाकृति के आधार पर - संवृत,अर्द्ध संवृत,अर्द्ध विवृत, विवृत 

  5. ओष्ठ आकृति के आधार पर - वृताकार, अवृताकार

  6. उच्चारण स्थान के आधार पर - अनुनासिक,अननुनासिक 

A.  उच्चारण समय/ मात्रा/ काल के आधार पर :- स्वरों के दो भेद हैं :- 1. हृस्व स्वर  2. दीर्घ स्वर 

1. हृस्व स्वर :-जिन स्वरों के उच्चारण में कम समय लगता है हृस्व/ लघु स्वर कहलाते हैं- अ,इ,उ,ऋ

2. दीर्घ स्वर :- जिन स्वरों के उच्चारण में अधिक समय लगता है दीर्घ गुरु/ स्वर कहलाते हैं -         आ,ई,ऊ,ए,ऐ,ओ,औ 


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